इंटरव्यू-कविता
इन्टरव्यू-कविता कवि जीत शिवहरे 'जुगनू' ========== =============== वह इन्टरव्यू देकर घर लौट रहा था मन ही मन कितना कुछ सोच रहा था। मिल जाये नौकरी तो बहन की शादी हो जाएं पिताजी के तन पर एक नयी खादी हो जाएं। मां की आंखों का आॅपरेशन हो जायेगा मेरे जीवन का सफल मिशन हो जायेगा। घर की छत को जमीन छूने से बचा लुगां हिलती दिवारों को गिरने से बचा लूगां। बहन का घर-घर बर्तन-झाडू छूटवां दूगां शादी में उसकी अपना सबकुछ लूटवां दूगां। नये सोफे पर बैठी मां के पैर दबाऊगां पिता को फ्रिज की आइसक्रीम खिलाउगां। कोई लड़की तब मेरी ओर भी देखेगी अधेड़ उम्र ही सही, मेरी शादी तो होगी। बनिये की उधारी भी चुकता हो जायेगी जो रूठे है उनसे फिर यारी हो जायेगी विचारों में अपने वह इतना मग्न था हाइवे की सड़क पर पैर अर्ध नग्न था। तेजी से आता कोई ट्रक उसे कुचल गया अरमानों के पंक्षी को फिर कोई छल गया। मां भोजन बनाकर तैयार बैठी है, बेटे को मिलेगी नौकरी, वह भी अपनी उम्मीदों का घरोदां संजाए बैठी है। रचयिता- जितेंद्र शिवहरे इंदौर 7746842533