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Showing posts from February, 2022

इंटरव्यू-कविता

 इन्टरव्यू-कविता   कवि जीत शिवहरे 'जुगनू'  ==========  =============== वह इन्टरव्यू देकर घर लौट रहा था मन ही मन कितना कुछ सोच रहा था। मिल जाये नौकरी तो बहन की शादी हो जाएं पिताजी के तन पर एक नयी खादी हो जाएं। मां की आंखों का आॅपरेशन हो जायेगा मेरे जीवन का सफल मिशन हो जायेगा। घर की छत को जमीन छूने से बचा लुगां हिलती दिवारों को गिरने से बचा लूगां। बहन का घर-घर बर्तन-झाडू छूटवां दूगां शादी में उसकी अपना सबकुछ लूटवां दूगां। नये सोफे पर बैठी मां के पैर दबाऊगां पिता को फ्रिज की आइसक्रीम खिलाउगां। कोई लड़की तब मेरी ओर भी देखेगी अधेड़ उम्र ही सही, मेरी शादी तो होगी। बनिये की उधारी भी चुकता हो जायेगी जो रूठे है उनसे फिर यारी हो जायेगी विचारों में अपने वह इतना मग्न था हाइवे की सड़क पर पैर अर्ध नग्न था। तेजी से आता कोई ट्रक उसे कुचल गया अरमानों के पंक्षी को फिर कोई छल गया। मां भोजन बनाकर तैयार बैठी है, बेटे को मिलेगी नौकरी, वह भी अपनी उम्मीदों का घरोदां संजाए बैठी है। रचयिता- जितेंद्र शिवहरे इंदौर 7746842533

कुत्तानियत (हास्य-व्यंग्य)

 *कुत्तानियत*    *हास्य-व्यंग्य (कविता)* ========    ============== शहर के चौराहे पर कुत्ता पकड़ने की गाड़ी आ के रूक गयी ये देख मोहल्ले के एक नेता की गर्दन शर्म से झूक गयी उनका व्यवहार आश्चर्य चकित कर देने वाला था एक वही तो बिन पूंछ के कुत्ते का दंभ भरने वाला था कुत्ता गाड़ी को देख वे दूम दबाके कहीं छिप गये माजरा कुछ कर भांप हम भी वही रूक गये हमने कहा नेताजी ये आपको पकड़ने नहीं आयी है आप तो यूं कांपे जैसे ये डाॅग स्क्वॉड नहीं सीबीआई है नेताजी बोले- अरे, नहीं भाई बात तुम्हे समझ नहीं आई है मुझे गाड़ी में पकड़ कर बैठाये गए कुत्तों की चिंता सताई है पिछली बार जब गलती से मैं पकड़ा गया था पिंजरे में कुत्ते कैदियों के संग जकड़ा गया था उस दिन उन कुत्तों ने बहुत उत्पाद मचाया था बड़ी मुश्किल से उनसे जान छुड़ा पाया था उस दिन वे कुत्ते बोल रहे थे- हमारी ऐसी तौहीन! अब हमे एक नेता के साथ रहना पड़ेगा कुत्ता बिरादरी में क्या इस बात से कहर नहीं पड़ेगा? हम इस नेता को यही काट-पीट के खां जाते है हम कौन से शाकाहारी प्राणी की गिनती में आते है? सुबह तक इसका नामों निशान भी न मिलने पायेग...

कविता शिक्षक की व्यथा

 ढोल की पोल व्यंग्य - कविता एक ऊर्जावान शिक्षक ने शाला में ज्वाइन किया स्कूल भवन को प्रणाम कर काम तो फाइन किया मन में बोले हर एक बच्चें को शिक्षित करूंगा विषम से विषम परिस्थितियों से मैं नहीं डरूंगा शिक्षक बच्चों को पढ़ाने के लिए तैयार हुये तब ही प्रधान अध्यापक से नैना दो-चार हुये हेड मास्टर बोले बीआरसी से किताबें उठा लाओ और अभी गणवेश का नाप दर्जी को देकर आओ और हां! कल जनशिक्षा केन्द्र पर तुम्हारी मीटींग है शिक्षक ने कहा सर! ये तो बच्चों के साथ चींटींग है एच एम ने कहा क्या तुम्हारी ऊपर तक सेंटिंग है? नहीं तो तुम्हारे बाद भी यहां एक शिक्षक वेटिंग है निराश शिक्षक सायकिल उठा कर चल दिया बच्चों को कैसे पढ़ाएं किसी ने नहीं हल दिया अगले दिन जब चाॅक और डस्टर उठाया पड़ोस का एक शिक्षक दौड़ते हुये आया बोले तुम्हारा नाम बीएलओ ड्युटी में आया है जल्दी भागो एक बजे कलेक्टर में बुलाया है घबराया शिक्षक भागते-दौड़ते चला जा रहा था बीच-बीच में जनशिक्षक का भी फोन आ रहा था (जनशिक्षक ने कहा-) सभी बच्चों की मेपिंग और रजिस्ट्रेशन आज ही कर दो शाम तक डाक बनाकर जनशिक्षा केन्द्र पर जमा कर दो संकूल प्राचार्य का ...