कुत्तानियत (हास्य-व्यंग्य)

 *कुत्तानियत*    *हास्य-व्यंग्य (कविता)*

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शहर के चौराहे पर कुत्ता पकड़ने की गाड़ी आ के रूक गयी

ये देख मोहल्ले के एक नेता की गर्दन शर्म से झूक गयी


उनका व्यवहार आश्चर्य चकित कर देने वाला था

एक वही तो बिन पूंछ के कुत्ते का दंभ भरने वाला था


कुत्ता गाड़ी को देख वे दूम दबाके कहीं छिप गये

माजरा कुछ कर भांप हम भी वही रूक गये


हमने कहा नेताजी ये आपको पकड़ने नहीं आयी है

आप तो यूं कांपे जैसे ये डाॅग स्क्वॉड नहीं सीबीआई है


नेताजी बोले- अरे, नहीं भाई बात तुम्हे समझ नहीं आई है

मुझे गाड़ी में पकड़ कर बैठाये गए कुत्तों की चिंता सताई है


पिछली बार जब गलती से मैं पकड़ा गया था

पिंजरे में कुत्ते कैदियों के संग जकड़ा गया था


उस दिन उन कुत्तों ने बहुत उत्पाद मचाया था

बड़ी मुश्किल से उनसे जान छुड़ा पाया था


उस दिन वे कुत्ते बोल रहे थे-


हमारी ऐसी तौहीन! अब हमे एक नेता के साथ रहना पड़ेगा

कुत्ता बिरादरी में क्या इस बात से कहर नहीं पड़ेगा?


हम इस नेता को यही काट-पीट के खां जाते है

हम कौन से शाकाहारी प्राणी की गिनती में आते है?


सुबह तक इसका नामों निशान भी न मिलने पायेगा,

अपने ही एक साथी खड़ा कर देंगे,

एक आधी चुनाव तो अपना ये शेरू कुत्ता भी जीत जायेगा


उनकी बातों से मेरा गला सूख रहा था

डर के मारे मैं कुत्ते की भांति भूख रहा था


अब मैंने अपने अन्दर के नेता को जगाया

मौके की नजाकत भांप कर कुत्तों को समझाया


हे मैंरे प्यारे कुत्ते भाईयों और प्यारी कुतियां बहनों !

हम दोनों सगे भाई है,

देश की खातिर हम दोनों ने राष्ट्र को बचाने की सौगंध खाई है


मैं कुछ ही पलों में यहां से छूट जाऊँगा

पर ये न समझना कि मैं आपको भूल जाऊँगा


मैं केबिनेट में एक नया प्रस्ताव लाऊंगा

हर एक कुत्ते को अपने -2 इलाके से चुनाव लड़वाऊगां


कुछ कुत्तों को राज्य मंत्री का दर्जा भी दिलाऊगां

बंगला, नौकर, चाकर और चमचमाती कार उपलब्ध कराऊगां


हर कुत्ते को कुतियां से प्रेम करने की आजादी होगी बकायदा धूमधाम से सामूहिक सम्मेलन में इनकी शादी होगी


विवाह का सारा खर्चा हमारी सरकार उठायेगी

डीजे साऊंड बग्घी घोड़ा गाडी और नागिन डांस भी करायेगी


कन्यादान में हर कुतियां को गृहस्थी का सभी सामान मिल जायेगा

गर्भावस्था में मुफ्त प्रसव, टीकाकरण और आर्थिक सहायता का लाभ दिल जायेगा


तुम्हारे पिल्लों की पढ़ाई-लिखाई भी निःशुल्क हो जायेगी

स्कूल बच्चें जाये न जाये- कपड़े, किताब, भोजन, सायकिल सब चलके पास आयेगी


एक रुपये किलो अनाज हर कुत्ता परिवार पायेगा

खाद, बीज, लोन और गैस सब्सिडी का पैसा भी आयेगा।


बीमारी से पीड़ित हर कुत्तें का इलाज विदेश में कराऊगां

किडनी, लीवर, हार्ट जो मांगो, सरकारी खर्च पर लगाऊगां।


हर कुत्ता पक्के आवास का अधिकारी होगा

घर- मकान पट्टे पर कुत्ते-कुतियां का फोटो आधारी होगा।


भगवान न करे कही दुर्घटना में कोई कुत्ता मारा जायेगा एक लाख की सहायता और शव जलाने पांच हजार पायेगा।


बुजुर्गं कुत्ते-कुतियां तीर्थ दर्शन यात्रा का लाभ लेंगे

रेल भाड़ा और खाना-पीना हम निःशुल्क दे देंगे।


अपराध के सभी प्रकरण कुत्तों के नाम से हटवा देंगे

कोई जानी दुश्मन हो तो कहना,

झूठे केस में उसे सूली पर लटका देंगे।


तुम्हारे जीने मरने की सभी व्यवस्थाएं हो जायेगी

सारी सुख सुविधाएं आहिस्ता-आहिस्ता तुम्हारी हो जायेगी।


हमने पूंछा- क्या वे कुत्ते आपसे मान गए?

आपकी शख्सियत अच्छे से पहचान गए?


नेताजी बोले-वे इन्सान नही थे न?

कुत्ते थे!

इसलिए नहीं माने,

शरीर में दो जगह काटे और मुझे लगे वहां से भगाने।


जाते-जाते एक कुत्ता कुछ यूं बोल गया

दिलों-दिमाग के सब दरवाजे खोल गया।


इन्सान की इन्सानियत तो मर चुकी,

शुक्र करो, कुत्तों की कुत्तानियत अभी बाकी है


14 से कुत्तोंके इन्जेक्शन 3 हो गये,

हमारा ज़हर भी इन्सानों पर नाकाफी है


तुम्हे काटा इसलिए कि कहीं तुम हमको लालची और कायर की परख में न उलझ जाओ

छोड़ इसलिए रहे है, नमक का फर्ज़ हम अब भी अदा करते है, इन्सान तुम अब भी समझ जाओ।


रचयिता-

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कवि जीत शिवहरे जुगनू इंदौर

177 इन्दिरा एकता नगर पूर्व रिंग रोड चौराहा मुसाखेड़ी इन्दौर मोबाइल नंबर–7746842533, 8770870151

मेल आईडी- jshivhare2015@gmail.com

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