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Showing posts from March, 2021

बूढ़ी-कहानी

       बूढ़ी-कहानी         सुरभि का ढलता यौवन उसके पति चिराग को ना गंवार गुजरता। अक्सर दोनों में इस विषय पर बहस छिड़ जाती। जवानी की दहलीज़ तक पहूंच चूकी उन दोनों की इकलौती बेटी रीतू को यह सब कभी अच्छा नहीं लगा। उसने अपने स्तर पर अपने माता-पिता को समझाया किन्तु दोनों अपनी-अपनी जिद छोड़ने को तैयार नहीं थे। चिराग बाॅडी बिल्डर था और सीधी-साधी आयु में बूढ़ी होती सुरभि उसका जोरदार मज़ाक उड़ा रही थी. सुरभि ने अपने आपको फीट रखने की भरपूर कोशिशें की किन्तु वह स्वयं को चिराग के बगल में खड़े होने योग्य कभी नहीं बना सकी। फलतः रोज-रोज की लड़ाईयों से तंग आकर सुरभि और चिराग ने परस्पर तलाक ले लिया। चिराग ने जल्द ही अपनी जिम की महिला स्टूडेंट अंकिता जो बाद में जिम ट्रेनर बन गयी, कोर्ट मैरिज़ कर ली। दोनों की परस्पर जबरदस्त बाॅन्डींग थी। रीतू ने अंकिता को अपनी दूसरी मां स्वीकरने में देर न की। अंकिता और रीतू में खूब पटती। रीतू के कॅरियर पर सुरभि से अधिक ध्यान अंकिता का था। यही सोचकर सुरभि, रीतू को अंकिता के पास आने-जाने से नहीं रोकती। सुरभि ने जब प्रेग्नेंट होने की ब...

लग जाएं मेरी उम्र तुझको-गीत

लग जाए मेरी उम्र तुझको-गीत गीत कह न सकूंगा दिल की तुझसे सजनीयां लग जायें मेरी उम्र तुझको सजनियां मेरे लिए छोड़ आई जो सारी दुनियां लग जायें मेरी उम्र तुझको सजनियां बदन ये थकान से जब टूट-टूट जायें हाथों से सिर की मालिश सब दुख भुलायें पति दुःख से आंखों में जो भर लाये पनियां लग जाये मेरी उम्र तुझको सजनियां व्रत और उपास करें और पति पूजें छोटे से आदमी का भक्त बन के झूमें  कुटियां में आकर रहती महलों की रनियां लग जायें मेरी उम्र तुझको सजनियां बच्चों के साथ घर के बड़ों को भी भाती आंगन महक उठता है जब-जब गाती दुःख के अंधियारें घर में लाती चन्दनियां लग जाये मेरी उम्र तुझको सजनियां गीतकार जितेन्द्र शिवहरे 

हास्य मुक्तक

 (1) दिल का एक मरीज़ दवाखाने जा पहूंचा दिल की लगी को अपनी वो बुझाने जा पहूंचा खींच के जुता लड़की ने दे मारा बीमार था वह दूसरी पटाने जा पहूंचा (2) दिलो दिमाग में कोई गंदगी न हो सफर में साथी साथ कोई संगी न हो मरना एक बार ही यहां दुनिया में जीना सौ बार भले तन पे लुंगी न हो (3) प्यार से भरा हृदय गोडाऊन है तु ही इको बेस और डीजे साऊण्ड है घर के बाहर निकलना बहुत कठीन है चौक पे खड़ी पुलिस और लाॅकडाऊन है। (4) क्लीनिक के बार बड़ी लम्बी लाइन थी इक मरीज के जेब में दो बाॅटल वाइन थी शराब की खूशबू से मन बहकर रहा था रिशेप्शन की लड़की मगर बहुत फाइन थी। (5) लड़की के सामने लड़का कुंवारा एक तेज बाइक पर भागा हुआ जाता है स्टाइल थोड़ी मारकर शेखी वो बघारकर मूंछ पर तांव देके मुस्कुराता जाता है थोड़ा आगे बढ़ते ही बाइक फिसल गयी लड़का औंधे मुंह गिर जाता है लड़की के साथ आसपास वाले हंस रहे शर्मिन्दा लड़का मुंह को छिपाता है। (6) मंदी के दौर था और उधार मांगता समुद्र जैसे अपनी सीमा को लांघता दुकानदार ने कहा युं हाथ जोड़कर (7) *हास्य व्यंग्य* सब्जी वाला बोला उधार कैसे दूं रोज-रोज़ सब्जी दो बार कैसे दूं मैंने बोला प...