लग जाएं मेरी उम्र तुझको-गीत

लग जाए मेरी उम्र तुझको-गीत

गीत

कह न सकूंगा दिल की तुझसे सजनीयां

लग जायें मेरी उम्र तुझको सजनियां

मेरे लिए छोड़ आई जो सारी दुनियां

लग जायें मेरी उम्र तुझको सजनियां


बदन ये थकान से जब टूट-टूट जायें

हाथों से सिर की मालिश सब दुख भुलायें

पति दुःख से आंखों में जो भर लाये पनियां

लग जाये मेरी उम्र तुझको सजनियां


व्रत और उपास करें और पति पूजें

छोटे से आदमी का भक्त बन के झूमें 

कुटियां में आकर रहती महलों की रनियां

लग जायें मेरी उम्र तुझको सजनियां


बच्चों के साथ घर के बड़ों को भी भाती

आंगन महक उठता है जब-जब गाती

दुःख के अंधियारें घर में लाती चन्दनियां

लग जाये मेरी उम्र तुझको सजनियां


गीतकार

जितेन्द्र शिवहरे 

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