गीत- मेरे दिल में तुम

 गीत-मेरे दिल में तुम इस तरह समा जाओ 


मेरे दिल में तुम इस तरह समा जाओ

जितना भी जाऊं दूर उतना करीब आओ

प्रेम लगन ये कैसी तुमने लगा दी है

छूकर मेरे मन को ये आग बढ़ा दी है


मेरे दिल में तुम


तेरे प्रेम पत्र के शब्द

मुझे कर जाते मौन और निशब्द

तेरे आंगन की वो बगियां

झर्र-झर्र बहती गांव की वो नदियां

उस आंगन आने को मन तरसा करता है

बिन तेरे दिल मेरा तड़पा करता है


मेरे दिल में तुम


अब करो न इतनी प्रशंसा

हम तेरे है सबकी है अनुशंसा

सभी रस्मे कसमें खाकर

खूश है जीवन प्रीत की रीत निभाकर

प्रेम लगन ये कैसी तुमने बढ़ा दी है

छूकर मेरे मन को ये आग बढ़ा दी है


मेरे दिल में तुम


माथे पे चमके कुमकुम

झूमके झूमे जैसे झूमे हम तुम

दीवाने हो रहे पागल

तेरे पैरों की बाज रही जो पायल

होठों के मुहाने पर काला तिल जो है

दिल बेचारे जूगनू का अब बचना मुश्किल है


मेरे दिल में तुम इस तरह समा जाओ


सर्वाधिकार सुरक्षित 

जितेन्द्र शिवहरे

कवि/लेखक

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मध्यप्रदेश

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