गीत-मुझे इकबार अकेले में
गीत- मुझे इक बार अकेले में
तुझको पाना है कुछ बताना है
न भूलाना है प्यार में
सुन मैं क्या करूं, ठण्डी आहें भरू
चाहती है क्या मरूं प्यार में
मुझे इक बार अकेले में मोहब्बत से पुकारो न
ये जीवन भी तुम्हारा है इसे आकर संवारो न
तुम्हें जो प्यार करने की इजाजत मुझको मिल जाए
तो क्या धरती क्या बादल ये सागर दिल मचल जाए
अग़र थोड़ा गल़त भी हूं तो तुम आकर सुधारो न
मुझे इक बार अकेले में मोहब्बत से पुकारो न
यकीं मेरी मोहब्बत पे अग़र तुमको न हो तो तब
बहारों और फिजाओ से हवा से पुछ लेना तब
तेरी सांसों की खुशबू के नशे में हूं उतारो न
मुझे इक बार अकेले में मोहब्बत से पुकारो न
जितेन्द्र शिवहरे
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