लिखो-कविता

*लिखो*


लिखो! खूब लिखो

बस लिखते रहो

सुबह और शाम लिखो

दिन और रात लिखो

कोई पढ़े न पढ़े

इस चिंता को छोड़कर

सभी शंकाओं का त्यागकर

कोई क्या कहेगा

क्या सोचेगा

इसे भूलकर 

धुंआ धार लिखो

इस पार लिखो

उस पार लिखो

इतना लिखो की कलम थक जाएं

मगर तुम न थकना

बार बार लिखो

मिटा मिटा के लिखो

कागज के पन्ने अलट पलट के लिखो

घूम-घूम के लिखो

झूम झूम के लिखो

परेशान हो तो लिखो

प्रसन्न हो तो लिखो

लिख डालो मन की भावनाएं

संवेदनाएं आशाएं और भविष्य के सपने

यादें भी लिखना

भुले बिसरे पलों को लिखना

प्रेम के आनंदित क्षण लिखो

रिश्ते नाते और परम्परा लिखो

लिखो किसने दिल दुखाया

रोया था तब किसने हंसाया

परस्पर हर एक संवाद लिखो

गीत गज़ल और कविता लिखो

लिखो धरा और नभ के विषय में

समुंद्र सरीता और वन के विषय में

सौन्दर्य पर तो कितना लिखा जा सकता है

प्रेमियों पर लिखो

जुदाई पर लिखो

दोनों का मिलन लिखो

रूठना-मनाना

और बेवफाई पर लिखो

मां पर लिख सकती है ग़र कलम तुम्हारी

तो स्वयं को धन्य समझना

पिता का त्याग और समर्पण लिख सको तो लिखो

बहन की राखी के धागे पर लिखो

उसकी शादी और बिदाई पर लिखो

स्कूल के रोचक किस्से

पसंद के अध्यापक पर लिखो

गली-मोहल्ले की यादें

पुराने दोस्त और मेलों पर लिखो

पान की दुकान की गपशप

नाई की दुकान की चौपाल पर लिखो

बुजुर्गों के अनुभवों को लिखो

शादी ब्याह और उत्सव पर लिखो

लड़ाई-झगड़े , देश-दुनियां पर लिखो

फिल्मी सितारे और ग्लेमर्स पर लिखो

राजनीती पर कलम चलाओ

धर्म, समुदाय और पंथ पर लिखो

लिखो समसामयिक मुद्दों पर

अत्याचार, अपराध और शौषण पर

लिखो बस लिखते रहो

तब तक जब तक की जीवन की शाम न हो जाए

तब तक लिखो

खूब लिखो

बस लिखते रहो


जितेन्द्र शिवहरे इंदौर मध्यप्रदेश

[04/02, 7:29 pm] Devda Sir: *म्हारो मगज खराब है-हास्य कविता*


बनिया उधार नी दे रा

दर्जी सलवार नी दे रा।


मूंछें ताव नी दे री

लड़कीयां भाव नी दे री


बैंक वाले कैश नी दे रे।

अमिताभ सलमान को ऐश नी दे रे।


मुर्गीयां अण्डे नी दे री

पुलिस अब डण्डे नी दे री


सालीयां गाली नी दे री

पत्नीयां साली नी देे री।


तुफान थम नी रा

बर्फ जम नी रा।


बस ट्रेन चल नी री

मंहगाई डायन हल नी री।


नेता इलाके में आ नी रे

मेहमान आके जा नी रे।


चुनाव रूक नी रे

गुण्डे झूक नी रे।


इन्सान नम नी रा

गोला बारूद कम नी रा।


गर्मी जा नी री

कूलर बीना नींद आ नी री।


आसमान संवर नी रा

मजदूर पे धूप का असर नी रा


पड़ोसन हंस नी री 

गर्लफ्रेंड फंस नी री।


युवाओं की हट नी री

आंखें डर से फट नी री।


छोरा प्यार में नट नी रा

बाप का कद घट नी रा।


आसमान से पानी गिर नी रा।

फिर भी इन्सान चीड़ नी रा।


टीवी की गति मंद नी हो री

बहुओं की चुगली बंद नी हो री।


मारपीट के बिना फिल्म आ नी री

अबे कोयल मधुर गीत गा नी री।


घरों में आजकल रिश्तें टिक नी रे

हीरोइन के बदन पे कपड़े दिख नी रे।


खाने की भूख नी री

काया फिर भी सूख नी री।


बच्चे रात रात भर सो नी रे

सुबह उठके भी मूंह धो नी रे।


जमीन धंस नी री

प्रकृति बस में नी री।


लोग आपस में मिल नी रे

रिश्तों के फूल खिल नी रे।


भगवान कहीं दिख नी रे

भिखारी भीख से भी बिक नी रे।


कवि/ शाय़र छूप नी रे

भूखे रहले पर चुप नी रे।


इन्हें लोग बोलने नी दे रे

कमर से धोती खोलने नी दे रे।


जनता कवि सम्मेलनों में आ नी री

कविता-गज़ल लोगो को भा नी री।



सर्वाधिकार सुरक्षित

जितेंद्र शिवहरे

07746842533

[04/02, 7:29 pm] Devda Sir: *रोशन सिंह सोढ़ी की पार्टी-शार्टी*


(हास्य रचना)


       *रोशन* सिंह सोढ़ी ने रविवार के दिन अपने मित्र जेठालाल और गोकुलधाम सोसायटी के अन्य दोस्तों के साथ घूमने-फिरने और पार्टी-शार्टी का प्लान बनाया। पर वे भूल गए की उन्होंने इसी रविवार को स्वयं की श्रीमती (रोशन भाभी) जी को भी मूवी दिखाने का प्राॅमिश किया था। सोढ़ी जी सनडे की सुबह जल्दी उठे। स्नान आदि कर नये कपड़े पहने और क्रिम पावडर मुंह में चिपोड़ लिया। खूब सारा सेन्ड खुद पर छिड़का और एक पैर घर से बाहर निकालने ही वाले थे कि रोशन भाभी जी की मधुर आवाज कमरे के अन्दर से आयी --


"अकेले अकेले अकेले (इको में••)

कहां जा रहे हो (रहे होsssरहो रहोsss)

अकेले अकेले कहां जा रहे हो

हमें साथ ले लो जहां जा रहे हो•••••"


सोढ़ी जी को याद आया की आज पत्नी को मुवी दिखाने का वादा किया था। अब क्या करे? तब देखिये भाभीजी को कैसे बहला रहे है-----


"दिल क्या करे जब किसी को सनडे को काम आ जाये••

जाने कहां कब किसी को सनडे को काम आ जाये••

ओsss गैराज से देनी है कुछ कारे अर्जेन्ट में

न ये मेरे बस में जानम न ये तेरे बस मेंsssss


हम क्या करे जब किसी को सनडे को काम आ जाये

जाने कहां कब किसी को सनडे को काम आ जाये।"


रोशन भाभी ने जवाब दिया--


"सजन रे झूठ मत बोलो खुदा के पास जाना है

न हाथी है न घोड़ा है वहां पैदल ही जाना है•••

सजन रे झुठ मत बोलो,

खुदा के पास जाना है जाना है••"


सोढ़ी की पड़ोसन बबिता जी अपने घर की बालकनी से यह सब देख रहीं थी। उन्होनें वहीं से चिल्लाया--

"सोढ़ी भाई!

जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा

रोके जमाना चाहे रोके खुदायी मुवी दिखाना पड़ेगा•••

भाभी को सिनेमा ले जाना पड़ेगा••••"


       सोढ़ी जी को पता है की बबिता जी को यह पता है की सोढ़ी जी के गैराज में कोई काम नहीं है। क्योंकि वे कल उनके गैराज़ गयी थी अपनी कार रिपेयर करवाने। वहां उन्हें पता चला की सनडे को गैराज बंद रहेगा। क्योंकि सोढ़ी और उनके दोस्तों ने मिलकर सनडे के दिन पार्टी-शार्टी की योजना बनायी है। कहीं बबिता जी उनकी धर्मपत्नी को यह सब बता न दे इसलिए सोढ़ी भाई वही से बबिता जी को देखकर समझा रहे है--


"पर्दे में दो रहने दो पर्दा न उठाओ--2

पर्दा जो उठ गया तो भेद खुल जायेगा 

अल्लाह मेरी तौबा अल्लाह मेरी तौबा•••"


सोढ़ी ने पोपटलाल को पार्टी का निमंत्रण नहीं दिया था। पोपटलाल को जब यह बात पता चली तो वो बहुत नाराज हुये। उन्होंने मन ही मन निश्चय कर लिया की मैं भी खेलूगां वर्ना खेल बिगाड़ूगां!

सोढ़ी के फ्लैट के पास ही रहने वाले पोपटलाल ने अपनी बालकनी से देखा की दोनो पति-पत्नी आपस में बहस कर रहे है।


पोपटलाल ने ऊंची आवाज़ में फरमाया --

"सोढ़ी!

राज की बात कह दूं तो जाने महफिल में फिर क्या हो••••2"


सोढ़ी गुस्से में बोल पड़े--

"राज खुलने का तुम पहले ओsss! राज खुलने का तुम पहले जरा अंजाम सोच लो•••• इशारों को अगर समझो राज़ को राज़ रहने दो•••"

 


जेठालाल जो बहुत समय से पोपटलाल का इंतजार कर रहे थे। फोन लगाकर कोड वर्ड में सोढ़ी से बात करते है---


जेठालाल - "देर ना हो जाये कहीं देर न हो जाये।"


सोढ़ी भाई, जेठालाल जी को मोबाइल पर ही कोडवर्ड में शांत चित्त होकर जवाब देते है--


"रस्ता रोका कभी काली घटा ने, (बीवी को देखकर)

घेरा डाला कभी बैरन हवा ने, (बबिता जी को देखकर)

बिजली चमके लगी आंखे दिखाने, (बीवी को देखकर)

बदले है कैसे कैसे तेवर फिजा ने--2 (पोपटलाल को)

मेरे जागने से पहले••• हाय रे मेरी किस्मतsss

मेरे जागने से पहले हाय रे मेरी किस्मत सो जाती है

मैं देर करता नहीं देर हो जाती है•••"


जेठालाल फोन पर ही लगे हुये है --


"देर ना हो जाये कहीं देर न हो जाये--2"


रोशन भाभी, सोढ़ी भाई और जेठालाल के कोडवर्ड को पहचान गयीं!


वो सोढ़ी भाई को देख कर कहती हैं --


"ना जारेsss ये मेरा मन घबरायेsss।"


जेठालाल फिर से फोन पर सोढ़ी भाई से कहते है-


"देर ना हो जाये कहीं देर न हो जाये--2"


तारक मेहता, हंसराज हाथी, आत्माराम भिड़े और कृष्णनन् अय्यीअर भी मोबाइल कान्फ्रेंस पर कोरस में गाने लगे--


"होsss देर न हो जाये कहीं देर हो जाये--2"


जब रोशन भाभी को लगा की सोढ़ी भाई रूकने को तैयार नहीं है तब उन्होंने दुसरा गियर बदला।


रोशन भाभी जी--


"तुम तो धोखेबाज हो वादा करके भूल जाते

वादा करके भूल जाते हो•••2

रोज़ रोज़ तुम जो सनम ऐसा करोगे--2

हम जो रूठ जायेंगे तो हाथ मलोगे••"


सोढ़ी भाई को लगा की श्रीमती जी अब कुछ नाराज हो रहीं हैं तब इन्होंने भी अपना भी गियर बदला लिया----


"मैंने तेरे सपने लिए ही सात रंग के सपने चुने

सपने , सुरीले सपने--2"


रोशन भाभी जी ---- "ओ मेरे सपनों के सौदागर मुझे मुवी दिखाने ले जाव,

शापिंग, लंच जहां हो डिनर, मुझे ऐसा सिनेमा दिखाओ।"


सोढ़ी भाई कुछ कह पाते इससे पहले ही रोशन भाभी जी का दुसरा वार•••


रोशन भाभी -


देर से आनाsss जल्दी जानाsss

ऐ! साहिब ये ठीक नहीं है--2


पोपटलाल बालकनी से ही --- "रम्प पम्प पो रररर रम्प पम्प पोssss!"


सोढ़ी भाई--

छुट्टी लेकर आऊँगा मैं अगली बार मनडे की-2

जाने दो गैरेज है जाना कारों को भी है सुधराना

ऐ! साहिब ये ठीक नहीं--2


अब रोशन भाभी जी ने रामबाण छोड़ दिया। जो महिलाओं का सबसे शक्तिशाली हथियार होता है, जो कभी खाली नहीं जाता। *इमोशनल अत्याचार*


रोशन भाभी --

"कौन सुनेगा! किसको सुनाये!

कौन सुनेगा किसको सुनाये इसीलीए चुप रहते है•••"


अब सोढ़ी भाई से रहा नहीं गया। उन्हें बहुत गुस्सा आ रहा था। वे क्रोधित होकर सीधे घर के अन्दर चले गये। और अखबार खंगालने लगे। ये देखने की किस सिनेमाघर में कौन-सी मुवी लगी है। जहाँ उन्हें अपनी पत्नी को लेकर जाना है।


समाप्त 

-----------------------------------------------------

प्रमाणीकरण- रचना मौलिक होकर अप्रकाशित तथा अप्रसारित है। रचना प्रकाशनार्थ लेखक की सहर्ष सहमती है।


©®सर्वाधिकार सुरक्षित

लेखक--

जितेन्द्र शिवहरे 

177, इंदिरा एकता नगर पूर्व रिंग रोड मुसाखेड़ी इंदौर मध्यप्रदेश

मोबाइल नम्बर

7746842533

8770870151

Jshivhare2015@gmail.com Myshivhare2018@gmail.com

[04/02, 7:29 pm] Devda Sir: *चलो बुलावा आया है-हास्य पेरोडी गीत*


पत्नी जिनको याद करे वो पति निराले होते है

पत्नी जिनका नाम पुकारे किस्मत वाले होते है।


चलो बुलावा आया है बीवी ने बुलाया है

जय बीवी की

ओsss होsss

चलो बुलावा आया है बीवी ने बुलाया है

होsss ओsss घर पे तान्डव नृत्य जमा हाथ में बेलन लहराया हैss

चलो बुलाया आया है•••• जय पत्नी की•••


चलो बुलावा आया है बीवी ने बुलाया है

जय बीवी की -2


पत्नी देवी घर मंदिर में--(2), पति बेमौत मारे जाते है

ओ हंसते-हंसते आते है रोते-रोते जाते है•••

(कोरस में) हंसते-हंसते आते है रोते रोते जाते है•••

होsss ओsss मैंने भी पत्नी से बेलन चिमटा कई बार खाया है।


चलो बुलावा आया है बीवी ने बुलाया है

जय बीवी की -2


मैं भी तो एक पति हूं ना, पति ही पति को पहचाने -2

एक पति का दर्द क्या होता है पत्नी कोई क्या जाने

होsss ओsss

रात का खाना सुबह गर्म कर हंसते-हंसते खाया है।


चलो बुलावा आया है बीवी ने बुलाया है

जय बीवी की - 2


ओ प्रेम से बोलो जय बीवी की

सारे बोलो जय बीवी की

आते बोलो जय बीवी की

जाते बोलो जय बीवी की

वो कष्ट मिटाये जय बीवी की

भव पार लगाये जय बीवी की

वो भोली भाली जय बीवी की

कभी दे न गाली जय बीवी की

वो जोड़े बर्तन जय बीवी की

वो तोड़े बर्तन जय बीवी की

ओ जय बीवी की , जय बीवी की

जय बीवी की ,जय बीवी की


जय बीवी की कहते जाओ सब पतियों प्यारों को

बीवी से जो डरते आये उन बेबस दुखीयारों को

होsss ओsss

जिसको लाड़ मिला बीवी का उसने डांट भी खाया है


चलो बुलावा आया है बीवी ने बुलाया है

जय बीवी की - 2


जितेन्द्र शिवहरे इंदौर मध्यप्रदेश

Comments

Popular posts from this blog

मेरे बाबू ने खाना खाया क्या

भैया राजा राखी का उपहार चाहिये

इंटरव्यू-कविता