पंख लगा दो मुझको मैं उड़ना चाहती
पंख लगा दो मुझको मैं उड़ना चाहती हूं-गीत
पंख लगा दो मुझको मैं उड़ना चाहती हूं
पापा अभी और मैं पढ़ना चाहती हूं-2
धरती और आकाश नाप लेना चाहती हूं
पापा अभी और मैं पढ़ना चाहती हूं
पंख लगा दो मुझको मैं उड़ना चाहती हूं
शादी की है जिद क्यों नन्हीं सी मेरी उम्र है
भोलापन है मुझसे दुल्हन सी कहां शर्म है-2
गुड्डे-गुड़ियों की शादी रचाना चाहती हूं
पापा अभी और मैं पढ़ना चाहती हूं-2
पंख लगा दो मुझको मैं उड़ना चाहती हूं
दूध का गिलास भैया जब पीता है
रबड़ी रसमलाई खाता और जीता है
मुंह में पानी आये मन दुःख जाता है
आसूं बहते है नहीं देख कोई पाता है-2
पेटभर मिठाई इकदिन खाना चाहती हूं
पापा अभी और मैं पढ़ना चाहती हूं
पंख लगा दो मुझको मैं उड़ना चाहती हूं
छोटे भाई बहनों की देखभाल करती हूं
गाय बकरी मुर्गी सभी को पालती हूं
खेत चारा गोबर मन से कर जाती हूं
कपड़ा बर्तन झाडू खाना बनाती हूं
ये सब सारे खाम खुशी से करना चाहती हूं
पापा अभी और मैं पढ़ना चाहती हूं
पंख लगा दो मुझको मैं उड़ना चाहती हूं
भैया की तबीयत बिगड़े सेवा तुम करते हो
चार ख्वाहिशे पूरी तुम उसकी करते हो-2
मैं एक दिन मन से बीमार होना चाहती हूं
पापा अभी और मैं पढ़ना चाहती हूं
पंख लगा दो मुझको मैं उड़ना चाहती हूं
गिल्ली डंडा पतंग खेल बुलाते है
घर की खिड़की से कुछ बच्चे चिढ़ाते है
खेल खेल चर सबक सीखाना चाहती हूं
पापा अभी और मैं पढ़ना चाहती हूं
पंख लगा दो मुझको मैं उड़ना चाहती हूं
कपडे बदन छोड़ रहे सायकिल पुरानी है
खिलोने सभी टूटे चप्पल सिलवानी है
नयी सैंडिल पहनकर चलना चाहती हूं
पापा अभी और मैं पढ़ना चाहती हूं
पंख लगा दो मुझको मैं उड़ना चाहती हूं
जानती पूरा न मिले धन इस मजदूरी से
जलता घर का चूल्हा इस मजदूरी से-2
मजदूरी में हाथ बंटाना चाहती हूं
पापा अभी और मैं पढ़ना चाहती हूं
पंख लगा दो मुझको मैं उड़ना...
घर के कामकाज से पापा थक जाती हूं
भूख प्यास चक्कर से नीचे गिर जाती हूं
कुछ पल चैन से सो जाना चाहती हूं
पापा अभी और मैं पढ़ना चाहती हूं
पंख लगा दो मुझको मैं उड़ना चाहती
स्कूल काॅलेज की जो पढ़ाई कर लूंगी
कम्प्यूटर टैक्नोलॉजी की चढ़ाई चढ़ लूंगी
डाक्टर-इंजीनियर बनना चाहती हूं
पापा अभी और मैं पढ़ना चाहती हूं
पंख लगा दो मुझको मैं उड़ना चाहती हूं
पापा मैं तुमसे कुछ नाराज नहीं
पाला मुझको भले रीवाज़ नहीं
जन्मों जन्मों तुम्हारी बेटी होना चाहती हूं
पापा अभी और मैं पढ़ना चाहती हूं
पंख लगा दो मुझको मैं उड़ना चाहती हूं
जितेन्द्र शिवहरे
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