गीत-धरापे मैं आई सजन तेरे लिये
गीत-धरा पे मैं आई सजन तेरे लिये
धरा पे मैं आई सजन तेरे लिये
भर के मेरी मांग सात फेरे लिये
व्रत किये जप तप तेरे लिये-2
भर के मेरी मांग सात फेरे लिये।
धरा पे मैं आई सजन तेरे लिये
तुलसी का आंगना वो पीपल की छांव
चीड़ीयों की चीं-चीं वो कव्वें की कांव-2
ससुरार अब मैका हुआ मेरे लिए
भर के मेरी मांग सात फेरे लिये
धरा पे मैं आई सजन तेरे लिये
बिटियाँ का जन्म वो बेटे के पांव
सासू ननद और देवर के भाव-2
छूप के आसूं पीती बलम तेरे लिये-2
भर के मेरी मांग सात फेरे लिये।
धरा पे मैं आई सजन तेरे लिये
भूल कोई हो तो भूला दीजो
रुठ मैं जाऊं तो मना लीजो-2
सबकुछ मैं छोड़ आई तेरे लिये
भर के मेरी मांग सात फेरे लिये
धरा पे मैं आई सजन तेरे लिये
सर्वाधिकार सुरक्षित
जितेन्द्र शिवहरे
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