वंदना

 मां शारदे मेरा नमन स्वीकार करे-वंदना


मां शारदे मेरा नमन स्वीकार करे

कंठ विराकर के...

कंठ निराजकर हर दुविधा से पार करें


मां शारदे मेरा नमन स्वीकार करे....


वाणी मेरी सत्य कहे ऐसा वर दे मां

इष्टजनों की आशिष हो ऐसा घर दे मां

अभिमान जब आकाश छूये

तु पल में उतार दें....


मां शारदे मेरा नमन स्वीकार करे....


गीत कविता की गंगा युं ही बहती रहे

साहित्य बिन है जग प्यासा हर आंखें कहती रहे

जब-जब धरती पर पाप बड़े पुण्यों से उभार दे


मां शारदे मेरा नमन स्वीकार करे


चरणों में बैठे-बैठे नित्य नयी रचना हो

उद्गार हो सब मन के ऐसी संरचना हो

भव के भाव सागर में स्मृति अपार दे


मां शारदे मेरा नमन स्वीकार करे


जितेन्द्र शिवहरे


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