गीत-मेरी पहली मोहब्बत हो तुम

 गीत-मेरी पहली मोहब्बत हो तुम


मेरी पहली मोहब्बत हो तुम-2

दिल की लगी को बुझाऊं तो कैसे

तेरे दिल में आकर जाऊं तो कैसे

कि मेरी विरासत हो तुम

मेरी पहली मोहब्बत हो तुम


लरजती गरजती बरसती हो जैसे

साजन को सजनी तरसती हो जैसे

इठला के चलना बहकना महकना

सहेली से अपनी वो चूग-चूग चहकना

पलके जो झपके तो रात हो जाए

बालों को झटके बरसात हो जाए

समूंदर की गहराई दो आंखों में

मोहब्बत मोहब्बत ही बातों में

दीवाने की दावत हो तुम

मेरी पहली मोहब्बत हो तुम


जवां दिल जलों की धड़कती कहानी

हर दिल बसे वो ख्वाबों की रानी

खिड़की पे तेरी वो तांका झाकी

छत पे वो कपड़े सुखाती गिराती

पैरों से छम-छम मटकती जाएं

गुलिस्तां की फूलों की खूशबू आये

लरजते लबों को लाल किया है

कुदरत ने कैसा कमाल किया है

शरीफो पे आफत हो तुम

मेरी पहली मोहब्बत हो तुम


रातों में तारे उंगली से गिनना

ख्वाबों में साजन की बाहों में खिलना

घड़ी दो घड़ी में गुमसुम हो जाये

अगले ही पल को तु मुस्कुराएं

गालों पे इकदम नज़र टिके न

गर्दन से नीचे नज़र रूके न

कमसीन उमर है कहीं न फिसलना

जुगनू है बहके सम्भल के चलना

कस़म से कयामत हो तुम

मेरी पहली मोहब्बत हो तुम


मुझसे जो रूठे समने क्यों टूटे

गुस्सें में कहती हट जा ओ झूठे

नज़रे मिलाएं मुंह को छिपाएं

आंखों में टीप-टीप आंसू क्यों आए

तेरे बिन कहीं भी आराम नहीं है

सुबह तु ही मेरी शाम तु ही है

मंदिय की घंटी अजान तु ही है

खुदा तु ही मेरा राम तु ही है

कि मेरी इबादत हो तुम


मेरी पहली मोहब्बत हो तुम


सर्वाधिकार सुरक्षित 

जितेन्द्र शिवहरे

कवि/लेखक

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मध्यप्रदेश

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