गीत- सुन री सखी पिया मुझे

 गीत-सुन री सखी पिया मुझे 


सुन री सखी पिया मुझे देखते नहीं

दिन-रात काम पास बैठते नहीं-2

सांज और श्रृंगार भी मैं कर आऊं तो-2

दो पल को भी आंख सेंकते नहीं।


तीज और त्यौहार में पास बुलाते

इधर-उधर देखकर लौट ही जाते-2

लम्बी-लम्बी प्यार में अब फेंकते नहीं-2

मेरे पिया मुझको अब देखते नहीं...


सुन री सखी पिया मुझे देखतें नहीं...


ऑफिस के काम को घर ले आते

कहूं कुछ बोलूं तो आंख दिखाते-2

मस्त मेरी आंखों में बहकते नहीं-2

मेरे पिया मुझको अब देखते नहीं...


सुन री सखी पिया मुझे...


मेके मुझे लेने जब-जब आये

सास-ससूर साली में रम वो जाये-2

छुप के अब कलाईयां मरोड़ते नहीं-2

मेरे पिया मुझको अब देखते नहीं...


सुन री सखी पिया मुझे...


बच्चों बढ़ों की घर में आस है पूरी

मेरी मनोकामना की प्यास अधुरी-2

बाजुओ में अपनी समटते नहीं-2

मेरे पिया मुझको अब देखते नहीं।


सुन री सखी पिया मुझे...


लगता है डर मुझे है कोई ओर

जिसके जाल में है फंसा ये चित्तचौर-2

(क्योंकि) ज़िद के आगे घुटने मेरे टेकते नहीं-2

मेरे पिया मुझको अब देखते नहीं...


मेरे पिया मुझको अब देखते नहीं...

सुन री सखी पिया मुझे देखते नहीं...


सर्वाधिकार सुरक्षित 

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जितेन्द्र शिवहरे 


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