गीत-तुझे चाहता हूं कब से

 गीत-तुझे चाहता हूं कब से


तुझे चाहता हूं कब से

चाहे पूछ लेना सब से

तेरे दिल में घर बनाऊंगा

हां तुझे इतना चाहूंगा


तुझे चाहता हूं कब से


सावन की बूंदें भी देखो तरस रही-2

तुम्हें मुझसे मिलाने जमकर बरस रही

तेरे आंगन ही में आकर

तुझे डोली बिठाकर

तुझे अपने झर ले जाऊंजा

हां तुझे इतना चाहूंगा


सूरज मूखी चे पूष्प तेरी ओर है

तेरी सुन्दरता के चर्चे चारों ओर है

बिंदियां माथे पर लगाकर

गजरा बालों में सजाकर

तुझे पलकों पर बैठाऊंगा

हां तुझे इतना चाहूंगा


तुझे चाहता हूं कब से


मिलकर लिखेंगे प्रेम की एक नयी कहानी

जहां मैं राजा हूं और तु है मेरे दिल की रानी

धून कविता की सुनाकर

माला शब्दों की बनाकर

प्रेम गीतों को बहाऊंगा

हां तुझे इतना चाहूंगा


सर्वाधिकार सुरक्षित

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जितेन्द्र शिवहरे


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