प्रेम के मन मंदिर की-गीत
प्रेम के मन मंदिर की....
तू देवी मैं पुजारी
तेरे नाम की रटता माला
रूठे चाहे शिवाला.....
तेरे नाम की जपता माला
रूठे चाहे शिवाला.....
झुकते है श्रृध्दा सिर राहों में जब दिखती हो
धूप दीप चंदन की महक से महकती हो
यज हवन से उठती ऐसी तुम हो ज्वाला
तेरे नाम की रटता माला
रूठे चाहे शिवाला.....
संध्या में भोर में जब घंटीयां कहीं बजती है
आंखे जाने कितनों की तेरे दर्शन को तरसती है
रूप अनुपम है जो बांटें जग उजाला
देवों के गीतों में सब स्तुतियां गाते है
पुण्य पवित्र तेरे पदचिन्ह हृदय में बस जाते है
मरता भी जी जाएं तू अमृत का है प्याला
तेरे नाम रटता माला
रूठे चाहे शिवाला.....
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